जम्मू

साहिब बंदगी के सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज के 77वें अवतरण दिवस पर 18 अप्रैल को राँजड़ी, जम्मू में साहिब जी ने दूर-दूर से दर्शन को आए श्रद्धालु

18 अप्रैल 2026
JK
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साहिब बंदगी के सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज के 77वें अवतरण दिवस पर 18 अप्रैल को राँजड़ी, जम्मू में साहिब जी ने दूर-दूर से दर्शन को आए श्रद्धालु

साहिब बंदगी के सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज के 77वें अवतरण दिवस पर 18 अप्रैल को राँजड़ी, जम्मू में साहिब जी ने दूर-दूर से दर्शन को आए श्रद्धालु

साहिब बंदगी के सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज के 77वें अवतरण दिवस पर 18 अप्रैल को राँजड़ी, जम्मू में साहिब जी ने दूर-दूर से दर्शन को आए श्रद्धालु

Jammu,bureau report

साहिब बंदगी के सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज के 77वें अवतरण दिवस पर 18 अप्रैल को राँजड़ी, जम्मू में साहिब जी ने दूर-दूर से दर्शन को आए श्रद्धालुओं को अपने प्रवचनामृत से निहाल करते हुए कहा कि यह जीवात्मा बहुत लूट में है। इसे किसी से कुछ लेना देना नहीं है। आत्मा को लूटा जा रहा है। साहिब ने कई शब्दों में इसे इंगित किया। कबीर साहिब की बात आम आदमी ने समझी। रहीम के दोहों में देखोगे तो साहिब के दर्शन मिलेंगे। लेकिन कबीर साहिब को ब्लैक आउट किया। सत्य की एक आदत है कि कितना भी दबाओ, एक दिन उठेगा। आप पाप करते हो, एक दिन पता चलेगा।

इस आत्मा में काम, क्रोध नहीं है। जैसे नशा करने वाला नशे का आदी हो चुका है। नशे के लिए कुछ भी कर लेगा। इस तरह आत्मा मन, बुद्धि के साथ खराब हो गयी है। शरीर का ताना-बाना बहुत चालाकी से बुना गया है। मरने के बाद भी सांसारिक चीजों को नहीं भूलता है। मरने के बाद भी रिश्तेदारों से आकर मिलता है।

आत्मा का कोई माता-पिता नहीं है, आत्मा का कोई अधिष्ठा नहीं है। माथा ठनक जायेगा। इसका आदि और अंत नहीं है। फिर आत्मा आई कहाँ से है। इसको कोई बनाने वाला नहीं है, इसको कोई मिटाने वाला नहीं है। यह कम-ज्यादा नहीं होती है। इसका किसी देश काल में नाश नहीं होता है। इसलिए आत्मावादी आत्मा तक ही सीमित हैं। यह तो अंश है। अंश कहते हैं हिस्से को। इसलिए कुछ आत्मा को परमात्मा भी बोलते हैं।

जिस देश से आत्मा आई है, उस देश की कोई व्याख्या नहीं किया है। केवल कबीर साहिब ने की। सभी तीन लोक तक बोला। तीन लोक के स्वामी ही सबने बोला। त्रिलोकी नाथ सब ऋषियों ने कहा। कबीर साहिब ने चौथे लोक की बात कही। वहाँ काम नहीं है। वहाँ क्रोध नहीं है। वहाँ मोह भी नहीं है। वहाँ लोभ भी नहीं है। ये सब निरंजन ने पैदा किये। ये चीजें सबको नचाया। आप शास्त्रों में पढ़ते हैं कि फलाने ऋषि को क्रोध आया, फलाना मोह के वशूभूत हो गया। ये चीजें केवल सद्गुरु के नाम से काबू आयेंगी।


Dated : 18-4-2026

Publicity Secretary

Sant Girdharanand Paramhans Sant Ashram Ranjri

Tel : VijaypurDistt. : Samba

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प्रकाशित: 18 अप्रैल 2026
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